अज़रबैजान और आर्मीनिया (Armenia-Azerbaijan War) के बीच विवादित नागोर्नो-काराबाख़ (Nagorno-Karabakh) इलाके को लेकर भारी संघर्ष अभी भी जारी है और दोनों ही देशों की सेनाओं ने फिलहाल पीछे हटने से इनकार कर दिया है. इस युद्ध पर ईरान (Iran) ने चेतावनी दी है कि इससे तबाही आ सकती है और ये लड़ाई व्यापक रूप से क्षेत्रीय युद्ध को बढ़ा सकती है.

दोनों देशों का कहना है कि दक्षिण कॉकेशस इलाक़े में पिछले 25 सालों में हो रही सबसे घातक लड़ाई में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. पश्चिमी मीडिया से मिल रही ख़बरों के अनुसार पर नागोर्नो-काराबाख़ के रिहाइशी इलाक़ों में अज़रबैजानी सैना क्लस्टर बम गिरा रही है. अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुसार क्लस्टर बम का इस्तेमाल प्रतिबंधित है. हालांकि न तो अज़रबैजान ने और न ही आर्मीनिया ने इससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय कन्वेन्शन पर हस्ताक्षर किए हैं.

ब्रिटिश अखबार टेलिग्राफ़ ने कहा है कि नागोर्नो-कराबाख़ की राजधानी स्टेपनाकियर्ट में सप्ताहांत में हुई भीषण बमबारी के दौरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल देखा गया है. क्लस्टर बम ख़ास तरह के बम होते हैं जो एक साथ सैंकड़ों छोटे-छोटे बमों से बनते हैं. फटने पर ये बड़े इलाक़े में फैल जाते हैं और अधिक संख्या में लोगों को घायल कर सकते हैं. नागोर्नो-काराबाख़ में युद्ध ख़त्म होने के आसार बहुत कम दिख रहे हैं.

रॉयटर्स के मुताबिक अज़रबैजान का कहना है कि नागोर्नो-काराबाख़ के बाहर के उसके शहरों पर हमले के बाद लड़ाई पाइपलाइंस के नज़दीक पहुंच गई है जहां से यूरोप को गैस और तेल की आपूर्ति होती है. अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हमा अलीयेव ने कहा कि इस लड़ाई को रोकने के लिए आर्मीनिया को नागोर्नो-काराबाख़ और उसके आसपास के इलाक़ों से अपनी सेना हटानी होगी.

नाटो प्रमुख जेंस स्टोलनबर्ग ने दोनों पक्षों से नागोर्नो-काराबाख़ में जारी तुरंत लड़ाई ख़त्म करने के लिए कहा है. उन्होंने तुर्की के दौरे के दौरान कहा कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है. वहीं अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी कहा है कि युद्ध तो तुरंत रोका जाना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ओएससीई मिंस्क समूह के सह-अध्यक्ष देशों के विदेश मंत्रियों ने नागोर्नो-काराबाख़ और उसके आसपास के इलाक़ों में हिंसा बढ़ने की निंदा की है. साथ ही तुरंत और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से लड़ाई में हुए गंभीर नुक़सानों को लेकर चर्चा की है और जल्द युद्धविराम की घोषणा करने की अपील की है. आर्मीनिया की राजधानी येरेवान में लोगों ने काराबाख़ में लड़ रही अपनी सेना के लिए समर्थन जताया है. यहां के टाउन हॉल में एक बड़ी स्क्रीन लगाई गई है जिसमें देशभक्ति गाने बज रहे हैं और वहां रहने वाले लोगों ने गलियों में झंडे फहराने शुरू कर दिए हैं.

एक हफ़्ते पहले शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक कम से कम 200 लोगों की जान जा चुकी है. इससे पहले नागोर्नो-काराबाख़ में साल 2016 में भी भीषण लड़ाई हुई थी जिसमें 200 लोगों की मौत हुई थी. अमेरिका, फ्रांस और रूस ने संयुक्त रूप से नागोर्नो-काराबाख़ में लड़ाई की निंदा की है और शांति वार्ता के लिए कहा है, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं.

बता दें कि नागोर्नो-काराबाख़ करीब साढ़े चार हज़ार वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला ये एक पहाड़ी इलाका है. इस इलाके में पारंपरिक रूप से आर्मीनियाई मूल के ईसाई और तुर्की मूल के मुसलमान रहते हैं. ये पहले सोवियत संघ के ज़माने में ये अज़रबैजान के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी इलाका था. अंतरराष्ट्रीय रूप से इस इलाके को अज़रबैजान का ही हिस्सा माना जाता है लेकिन इसकी बहुसंख्यक आबादी आर्मीनियाई मूल के लोग हैं. साल 1988-94 के दौरान हुए युद्ध में तकरीबन दस लाख लोग विस्थापित हुए थे और 30 हज़ार लोग मारे गए थे. तुर्की खुलकर अज़रबैजान का समर्थन करता है. आर्मीनिया में रूस का एक सैनिक अड्डा है.

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