नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी युवराज सिंह ने पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी के बयान को लेकर निराशा जताई है और कहा है कि वह पाकिस्तानी खिलाड़ी के किसी काम में अब कभी कोई सहयोग नहीं करेंगे।

युवराज ने ट्वीट किया, अफरीदी के हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान से बेहद निराश हूं। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते जो भारत के लिए खेला हो, मैं इस तरह के शब्द स्वीकार नहीं कर सकता। मैंने वो अपील आपके (अफरीदी के) कहने पर इंसानियत के नाते की थी, लेकिन अब दोबारा नहीं।

हरभजन और युवराज ने हाल में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए शाहिद अफरीदी फाउंडेशन में दान देने की लोगों से अपील की थी। हरभजन ने भी अफरीदी के बयान पर गुस्सा जाहिर किया और कहा कि वह अब पाकिस्तान खिलाड़ी से कोई संबंध नहीं रखेंगे।

स्टार आफ स्पिनर ने कहा, ईमानदारी से कहूं तो उन्होंने (अफरीदी) हमें अपनी चैरिटी की मदद के लिए कहा। ऐसे में, हमने इसे मानवता के लिए और कोरोनावायरस के कारण पीड़ित लोगों के लिए मदद किया था।

हरभजन ने आगे कहा, ये एक बिमार आदमी है जो हमारे देश के बारे में ऐसा सोचता है। मुझे बस इतना कहना है कि शाहिद अफरीदी से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। अफरीदी को अपने देश पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और अपनी सीमा में रहना चाहिए। मुझे केवल इतना ही कहना है कि हमारे देश के खिलाफ उसने जो भी बोला वो बर्दाश्त के बाहर है और मैं आज से उसके साथ सभी रिश्ते तोड़ता हूं।

उन्होंने कहा, मैं इस देश में पैदा हुआ हूं और इसी देश में मरूंगा। मैं 20 साल से भी अधिक समय तक इस देश के लिए खेला हूं और इसके लिए मैच जीते हैं। किसी को भी मेरे देश के खिलाफ कुछ कहने का हक नहीं है।

अफरीदी ने पहले कहा था, कश्मीर के लोगों की पीड़ा को समझने के लिए आपको धार्मिक आस्था की जरूरत नहीं है बल्कि सही जगह दिल के होने की जरूरत है।

हरभजन से पहले पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने भी अफरीदी पर निशाना साधा था।

गंभीर ने रविवार को ट्विटर पर कहा, पाकिस्तान के पास सात लाख की फोर्स है जिसका समर्थन 20 करोड़ लोग करते हैं, यह कहना है 16 साल के अफरीदी का। फिर भी कश्मीर के लिए 70 सालों से भीख मांग रहे हैं। अफरीदी, इमरान और बाजवा जैसे जोकर भारत और प्रधानमंत्री के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं, लेकिन पाकिस्तान के लोगों के लिए कयामत के दिन तक कश्मीर नहीं ले सकते। बांग्लादेश याद है?

ReportLook Desk

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