फर्जी टीआरपी घोटाले को लेकर रिपब्लिक भारत चैनल पर एक कार्यक्रम का प्रसारण हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान अर्नब गोस्वामी ने दावा किया कि BARC (Broadcast Audience Research Council) ने रिपब्लिक टीवी को भेजे एक ईमेल में साफ कहा है कि फर्जी टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी का कोई नाम नहीं है। लेकिन अब बार्क ने एक ट्वीट कर रिपब्लिक टीवी के इस दावे को गलत बताया है।

BARC ने अपने एक बयान में कहा है कि “बार्क ने मौजूदा जांच को लेकर कोई बयान नहीं दिया है और यह जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी मुहैया करा रहा है। बार्क रिपब्लिक नेटवर्क के एक्शन से बेहद खफा है कि उसने एक गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक किया और वो भी गलत तरीके से। बार्क ने जोर देकर कहा कि उसने जांच को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है और रिपब्लिक नेटवर्क के एक्शन से काफी आहत है।”

बता दें कि अर्नब गोस्वामी ने अपने टीवी कार्यक्रम में दावा किया था कि ‘आज बार्क ने हमे कहा है कि कुछ भी नहीं है रिपब्लिक के खिलाफ, अगर कुछ होता तो हम पहले बोलते या आपसे कागजात मांगते या केस करते लेकिन ऐसा कोई भी तथ्य हमारे पास नहीं है।’

अर्नब गोस्वामी ने इस दावे के साथ ही मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को बर्खास्त करने की मांग भी की। साथ ही गोस्वामी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगने की मांग की।

बता दें कि टीआरपी घोटाले का खुलासा उस वक्त हुआ था। जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के जरिए पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी और आरोप लगाया था कि विज्ञापन के लालच में कुछ चैनल्स टीआरपी के आंकड़ों में धोखाधड़ी कर रहे हैं।

खुलासा हुआ ता कि चैनल्स द्वारा लोगों को विशेष चैनल देखने के पैसे दिए जा रहे थे। जिससे उनकी टीआरपी बढ़े और उन्हें विज्ञापन मिलें। कुछ दिन पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घोटाले का खुलासा किया था। शिवसेना नेता संजय राउत ने अपने एक बयान में कहा था कि यह टीआरपी घोटाला करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है।

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