उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार की एक रैली में अर्णब गोस्वामी को बड़ा पत्रकार बताया है। जबकि अर्णब गोस्वामी एक टीवी शो में उन्हें अनपढ़ और पागल बता चुके हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता पवन पांडे ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, ‘क्या से क्या हो गया देखते-देखते।’ इस वीडियो में सीएम योगी के भाषण का अंश है जिसमें वह कांग्रेस पर लोकतंत्र का गला घोटने का आरोप लगा रहे हैं। योगी ने कहा, ‘1975 में कांग्रेस ने इमरजेंसी लगा दी थी। और आज भी आपने देखा होगा देश के एक बहुत बड़े पत्रकार को अपने स्वार्थ के लिए गिरफ्तार करके लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने का कार्य कांग्रेस कर रही है।’

इस वीडियो में बाद में टीवी शो का वह अंश भी लगाया गया है जिसमें अर्णब ने कहा था, ‘योगी आदित्यनाथ तो ऐसे व्यक्ति हैं, उनको धर्म के बारे में कुछ पता ही नहीं है। ऐसे अनपढ़ व्यक्ति हैं कि किसी को कहना चाहिए आप अपना मेंटल बैलेंस चेक करवाइए।’ बुधवार को अर्णब को उनके घर से ही अलीबाग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। 2018 में खुदकुशी के लिए उकसाने के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी की गई। जबकि अर्णब के समर्थकों का कहना है कि वह मामला पहले ही बंद हो चुका था।

अर्णब की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी खुलकर उनके समर्थन में दिखाई दे रही है। बिहारी की रैलियों में बीजेपी नेता इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना की तुलना 1975 के आपातकाल से की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। अर्णब के वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि खुदकुशी मामले में जांच के समय अर्णब ने सभी दस्तावेज उपलब्ध करवाए थे और जांच में सहयोग किया था। अन्वय की कंपनी की बकाया राशि का 90 प्रतिशत भुगतान भी कर दिया गया था लेकिन खाते निष्क्रिय होने की वजह से राशि वापस आ गई।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में जमानत अर्जी खारिज की है। कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और कहा है कि दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद ही जमानत पर फैसला किया जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों को जवाब फाइल करने के लिए शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक का वक्त दिया है।

फिलहाल अर्णब को अंतरिम जमानत नहीं मिली है। हालांकि अलीबाग कोर्ट ने कहा था कि शुरुआत में यह गिरफ्तारी अवैध लगती है। गिरफ्तारी के बाद पहली रात अर्णब को एक कोविड सेंटर में बितानी पड़ी थी। महाराष्ट्र सरकार के मुलाजिमों का कहना है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और पुलिस कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। संजय राउत ने बीजेपी को नसीहत दे डाली की आप मृतक के परिवार से मिलने नहीं गए थे फिर पत्रकार के साथ संवेदना क्यों जता रहे हैं?

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