सुप्रीम कोर्ट ने सपा सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को शुक्रवार को बड़ी राहत दे दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उप्र के रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने के आदेश पर शीर्ष कोर्ट ने रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम होने के कारण उनकी विधायकी रद्द करते हुए स्वार सीट पर उपचुनाव का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना व जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘चुनाव आयोग को स्वार सीट के उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाता है।’ ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब्दुल्ला द्वारा दायर दो अपीलों की सुनवाई कर रही है। इनमें से एक उनकी विधायकी को खारिज करने को चुनौती देने वाली है और दूसरी चुनाव आयोग को उपचुनाव कराने से रोकने को लेकर।  

पहले स्थगन से इनकार किया था सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 17 जनवरी को अब्दुल्ला का चुनाव रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही चुनाव आयोग व पराजित बसपा प्रत्याशी नवाज अली को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अब्दुल्ला की उम्र को लेकर स्कूल रिकॉर्ड के अलावा कुछ अन्य दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिनसे उनकी चुनाव लड़ने की पात्रता को लेकर संदेह पैदा होता है। 

बसपा प्रत्याशी ने लगाया था केस
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए अब्दुल्ला आजम खान की विधायकी रद्द की दी थी कि  2017 में हुए विस चुनाव के वक्त उनकी उम्र चुनाव लड़ने की आयु से कम थी। इसे लेकर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार नवाब काजिम अली ने अब्दुल्ला के चुनाव के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में अब्दुल्ला पर फर्जी  उम्र प्रमाण पत्रों की मदद से चुनाव लड़ने का आरोप लगाया था। अली के मुताबिक खान के पास जन्म के दो दस्तावेज हैं। 

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