बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के तीसरे चरण के मतदान के साथ ही वोटिंग की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। अब सभी को मतगणना वाले दिन यानी 10 नवंबर का इंतजार है। तीनों चरण में उम्मीद से अधिक मतदान हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि 15 साल से बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार लगातार चौथी बार वापसी करने में सफल होते हैं या जनता बदलाव कर तेजस्वी यादव को गद्दी सौंपती है। उससे पहले न्यूज चैनल्स एग्जिट पोल के साथ आ चुके हैं। टाइम्स नाउ- सीवोटर के सर्वे में किसी भी गठबंधन को बहुमत मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। लेकिन महागठबंधन को सबसे अधिक 120 सीटें मिल रही हैं। वहीं एनडीए को 116 सीट, एलजेपी को 1 और अन्य को 6 सीट मिल रही है। बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं और बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत होगी।

सबसे ज्यादा वोट एनडीए के पक्ष में

टाइम्स नाउ और सीवोटर के सर्वे में एनडीए यानी बीजेपी, जेडीयू, हम और वीआई को 37.70 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं महागठबंधन यानी आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों को 36.30 प्रतिशत मत मिले हैं। वहीं एलजेपी को 8.50 प्रतिशत और अन्य को 17.50 प्रतिशत मत मिले हैं।

85 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी

टाइम्स नाउ और सीवोटर के सर्वे में एनडीए के दलों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है और उसे 70 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। वहीं जेडीयू को 42, हम को 2 और वीआईपी को 2 सीटें मिल रही हैं। वहीं महागठबंधन में सबसे बड़ा दल आरजेडी है और इसे 85 सीटें मिल रही हैं। वहीं कांग्रेस को 25 और लेफ्ट दलों को 10 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है।

तीसरे चरण में 55 प्रतिशत से अधिक मतदान

चुनाव आयोग की तरफ से आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, तीसरे चरण में शाम 6 बजे तक 55 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। तीनों चरण के वोटिंग में महिला मतदाताओं ने जमकर मतदान किया है। इसको लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं कि आखिर इनका वोट किस तरफ गया है? इसे जानने के लिए हमें 10 नवंबर तक का इंतजार करना होगा।

2015 से इस बार अधिक हुई वोटिंग

बिहार विधानसभा चुनाव के तीनों चरण के मतदान के प्रतिशत को देखें तो इस बार 2015 से अधिक वोट पड़े हैं। इस बार पहले चरण में 55.69, दूसरे चरण में 55.70 और तीसरे चरण में कुल 55.22 प्रतिशत मतदान हुआ है। वहीं 2015 में पहले चरण में 54.94, दूसरे चरण में 56.17 और तीसरे चरण में 53.32 प्रतिशत मतदान हुआ था।

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई गठबंधन हैं। पहला गठबंधन, नीतीश कुमार की अगुवाई वाला एनडीए है। इसमें जेडीयू, बीजेपी, जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी शामिल है। वहीं दूसरी तरफ आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों को गठबंधन है। इसे महागठबंधन का नाम दिया गया है। इसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव हैं। एक गठबंधन उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, बसपा, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ है। इसके अलावा पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रेशेखर है।

इन सबसे अलग लोक जनशक्ति पार्टी पर भी सबकी नजरे हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को अस्वीकार करते हुए एनडीए से अलग रुख अख्तियार कर लिया था। वे अकेले ही चुनावी मैदान में थे। उन्होंने जेडीयू के खिलाफ मोर्चा खोला और अपने उम्मीदवार भी उनके खिलाफ खड़े किए। हालांकि इस दौरान वे बीजेपी को लेकर नरम रहे और दावा किया कि वे पीएम मोदी के हनुमान हैं।

(डिस्क्लेमर: एग्जिट पोल्स सर्वे के निष्कर्ष हैं। परिणाम इससे भिन्न हो सकते हैं।)

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