कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आज बातचीत होनी है। इस दौर की बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे किसान आंदोलन के आगे की पृष्ठभूमि साफ होगी। इस बीच हरियाणा में भाजपा के साथ सरकार में शामिल जजपा ने साफ किया है कि अगर नए कानून से किसानों की MSP पर आंच आती है, तो उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला तुरंत इस्तीफा दे देंगे।

बता दें कि 90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा में जहां भाजपा के पास 40, वहीं जजपा के पास 10 सीटें हैं। इसके अलावा कांग्रेस के पास 31 सीटें हैं। यानी जजपा एक तरह से किंगमेकर की भूमिका में है। इस लिहाज से जजपा की यह धमकी भाजपा के लिए काफी गंभीर हो सकती है। बता दें कि एक दिन पहले ही दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने कहा था कि पार्टी का अगला कदम 3 दिसंबर को होने वाली मीटिंग के बाद तय होगा।

MSP पर कानून में एक लाइन जोड़ने में दिक्कत क्या है?: इससे पहले जजपा नेता और पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला ने कहा था कि केन्द्र को प्रदर्शन कर रहे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लिखित आश्वासन देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि जब केंद्रीय कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कह रहे हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जारी रहेगा, तो कानून में उस एक लाइन लिखने में क्या दिक्कत है।

निर्दलीय विधायक दे चुके हैं भाजपा-जजपा सरकार से इस्तीफा: गौरतलब है कि दादरी विधासभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार को ”किसान विरोधी” बताते हुए मंगलवार को उससे समर्थन वापस ले लिया था। सांगवान ने कहा था कि ये सरकार किसानों के साथ हमदर्दी रखने के बजाय उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले जैसे सभी उपायों का इस्तेमाल कर रही है। मैं ऐसी सरकार को अपना समर्थन जारी नहीं रख सकता हूं।

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