केंद्र के तीन नए कृषि बिलों के खिलाफ किसान प्रदर्शन के बीच भाजपा की हरियाणा इकाई के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विवादास्पद सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण की मांग को लेकर एक दिवसीय उपवास किया। हालांकि भाजपा नेताओं को फतेहाबाद, करनाल सहित अन्य स्थानों पर कृषि कानूनों को लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इसमें शनिवार को फतेहाबाद के पपीहा पार्क के पास भाजपा नेताओं का कार्यक्रम दो घंटे भी नहीं चल पाया। काले झंडे थामे हुए किसानों ने 15 मिनट बाद ही पुलिस बैरिकेड पार करके पार्टी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की।

पुलिस सुरक्षा के बावजूद किसानों ने कार्यक्रम स्थल का टेंट उखाड़ दिया और मंच पर कब्जा कर लिया। पुलिस ने कहा कि किसानों के विरोध के चलते भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ी सुरक्षा के बीच अपने उपवास स्थल को दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया। इसी तरह करनाल में किसानों के एक समूह ने भाजपा नेताओं के उपवास स्थल के पास ही विरोध-प्रदर्शन किया। मामले में हरियाणा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने इन घटनाओं की निंदा की। उन्होंने कहा कि कुछ ‘अनियंत्रित व्यक्ति’ इसमें लिप्त थे, जोकि निंदनीय है।

राज्य के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने भिवानी में कहा कि हरियाणा के किसान एसवाईएल नहर के निर्माण की मांग कर रहे हैं और राज्य को पंजाब से उसके हिस्से का नदी का पानी मिलना ही चाहिए। रोहतक में भाजपा सांसद अरविंद शर्मा ने कहा कि एक दिवसीय उपवास का उद्देश्य पंजाब सरकार पर हरियाणा के हिस्से का नदी का पानी देने के लिए दबाव बनाना था।

बता दें कि कृषि बिलों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन की बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संघों और सरकार के बीच वार्ता के अगले दौर के लिए रास्ता एक या दो दिन में निकल सकता है।

हरियाणा सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन शुरू होने के बाद से दूसरी बार तोमर से उनके आवास पर मुलाकात की है। इससे पहले खट्टर ने आठ दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात की थी। दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन करते हुए किसानों को आज 25 दिन हो गए हैं।

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