नई दिल्ली: भारत चीन सीमा विवाद आठवें दौर की वार्ता के बाद भी थमा नहीं है। दोनों देशों के सैनिक सीमा पर तैनात हैं। भारत ने किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी कर रखी है। इस बीच खबर है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तिब्बत में देश के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत से लिनझी को जोड़ने वाली नई 47.8 बिलियन डॉलर की रेलवे परियोजना के निर्माण में तेजी लाएं। यह क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के नजदीक है।

जिनपिंग का कहना है कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चीनी मीडिया के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक किंघाई-तिब्बत पठार के दक्षिण-पूर्व में जाएगी।

सिचुआन-तिब्बत रेलवे सिचुआन प्रांत की राजधानी चेंग्दू से शुरू होती है और यान से होकर जाती है। यह रेल चेंग्दू से ल्हासा तक की यात्रा को 48 घंटे से 13 घंटे तक कम करते हुए, केमडो से तिब्बत में प्रवेश करती है। लिनझी, जिसे निंगची के नाम से भी जाना जाता है, अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब स्थित है।

भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को कवर करता है, जो दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है, हालांकि भारत इस दावे को पहले ही मजबूती से खारिज कर चुका है।

13 अक्टूबर को चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बीजिंग लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित एक क्षेत्र है। हालांकि भारत ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है।

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