तिरुवनंतपुरम. ऑनलाइन टीम – केरल में स्थायनी चुनावों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। इस बीच, जमात-ए-इस्लामी के साथ कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने केरल में आगामी निकाय चुनावों के लिए जमात-ए-इस्लामी के राजनीतिक धड़े वेल्फेयर पार्टी ऑफ इंडिया के साथ गठबंधन किया है। सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के मुख्य धड़े CPM ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन के लिए कांग्रेस की आलोचना की है। फ्रंट ने कहा कि कांग्रेस ने वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (WPI) के साथ आने का फैसला किया है, जिसके परिणाम गंभीर होंगे।

बता दें कि दक्षिण भारतीय राज्य केरल राजनीतिक रुप से संवेदनशील राज्य है और शायद इसी वजह से लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता भी झेलता रहा है। इसका गठन तीन पुराने रजवाड़ों त्रावणकोर, कोचीन और मलाबार को मिलाकर किया गया था। एक तरह से 1947 से 49 के बीच यह राज्य अस्तित्व में आ गया था, लेकिन केरल को उसका वर्तमान स्वरुप में 1956 में जब भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ। आसपास के मलयालम बोलने वाले इलाक़ों को जोड़कर केरल का निर्माण किया गया। ईएमएस नंबूदरीपाद, एके गोपालन और टीएम वर्गीस जैसे नेताओं के साए में राज्य ने बीसवीं सदी के आरंभिक काल में राजनीतिक चेतना हासिल की, लेकिन समय के साथ इस राज्य की दिशा बदलती रही। यहां सीपीआई की अच्छी पैठ मानी जाती है।

बदलते नाटकीय घटनाक्रम को देखते हुए सीपीएम अब जमात-कांग्रेस गठबंधन की आलोचना कर इस नाराजगी को भी भुनाने की कोशिश में लगी है। सीपीएम ने स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर हुए इस गठबंधन के लिए कांग्रेस पर धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। सीपीएम के पोलित ब्यूरो मेंबर और राज्य सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने बताया, ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) पहले जमात-ए-इस्लामी का विरोध करता था, लेकिन अब उसे काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया, ‘जिस तरह RSS का लक्ष्य हिंदू राष्ट्र की स्थापना करना है। वैसे ही जमात-ए-इस्लामी देश में इस्लामिक राज स्थापित करना चाहती है। दोनों एक दूसरे के समानांतर हैं।’

बता दें कि केरल में अल्पसंख्यक मुस्लिम और ईसाई वोट परंपरागत तौर पर कांग्रेस का वोटर रहा है, लेकिन जोस मणि के एलडीएफ के साथ आने के बाद से सीपीएम अब सेंध लगाकर ईसाई वोटर्स को अपने पाले में करना चाहती है।

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