दिल्ली हाईकोर्ट पत्रकार अर्नब गोस्वामी और उनके टीवी समाचार चैनल को अदालती निर्देश देने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करेगा, ताकि चैनल को आपराधिक मामलों की जांच पर सूचना या समाचार प्रसारित करने से रोका जा सके। यह मामला मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है, जिसमें याचिकाकर्ताओं के वकील को आपराधिक मामलों में ट्रायल और जांच को विनियमित करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देशों का मसौदा प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए आगे की सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की गई है।

याचिका में केंद्र को आपराधिक जांच से संबंधित सभी समाचारों की रिपोटिर्ंग या प्रसारण को नियंत्रित करने के लिए नियमों एवं विनियमों को तय करने के लिए दिशानिर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में गोस्वामी और उनकी मीडिया कंपनी के खिलाफ 1971 के कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट के तहत कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की गई है।

याचिका में गोस्वामी और उनकी मीडिया कंपनी, जो रिपब्लिक टीवी चलाती है, उन्हें खोजी पत्रकारिता के नाम पर आपराधिक जांच से संबंधित सूचनाओं या समाचारों को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने के लिए अदालत के निर्देश की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता मोहम्मद खलील ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि गोस्वामी और उनकी कंपनी, अपने प्रसारण और प्रकाशनों के माध्यम से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित ‘विकृत और भ्रामक’ तथ्यों की रिपोटिर्ंग कर रहे थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार और टीवी चैनल सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग एंगल से जुड़ीं आरोपी के खिलाफ जनता की राय जानने के लिए जज और जूरी के रूप में व्यवहार कर रहे हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोस्वामी और उनके चैनल ने आरोपी द्वारा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को दिए गए बयान का चुनिंदा विवरण प्रकाशित और प्रसारित किया, ताकि यह इंगित किया जा सके कि आरोपी कथित अपराधों के लिए पकड़ी गईं हैं।

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