कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच 30 हजार से ज्यादा भारतीय नागरिक दुबई में फंसे हैं, जिन्हें सरकार भूल गई है। यूएई की धमकी के बाद भी सरकार नहीं पिघली। दरअसल, कोरोना वायरस से अपने नागरिकों को बचाने के लिए दुनिया का हर देश नए-नए हथकंडे अपना रहा है, लेकिन लॉकडाउन से लेकर कर्फ्यू लगाने के बावजूद दुनिया के कई देशों में रोजाना की तर्ज पर कोरोना के नए केस आ रहे हैं।

इसके चलते यूएई (संयुक्त अरब इमारत) सरकार ने बीते दिनों फैसला लिया कि दुबई समेत पूरे यूएई में गैर मुल्क नागरिक अपनी मर्जी से जाना चाहते हैं तो यूएई सरकार उन्हें अपनी एयरलाइन के स्पेशल विमान से उनके अपने वतन पहुंचा देगी। इस फैसले का कारण यह भी था कि यूएई में लॉकडाउन के बाद से लगभग सभी कंपनियां बंद हो गईं और सारा कामकाज ठप हो गया है, जिस वजह से लोग बेरोजगार हो गए हैं।

इसलिए भारतीय व पाकिस्तानी नागरिक सोशल मीडिया के जरिए अपने देश की सरकारों से अपील कर रहे थे कि उनके पास खाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं, ऐसे में उन्हें अपने वतन बुलाया जाए। इस मद्देनजर यूएई सरकार ने करीब सात देशों को संदेश भेजा कि वह अपने अपने नागरिकों को यूएई से वापस अपने देश बुलाएं, लेकिन इस संदेश को भारत और पाकिस्तान की सरकार ने यह कहकर ठुकरा दिया कि फिलहाल वह बाहर से अपने नागरिकों को बलाने की स्थिति में नहीं हैं।

धमकी मिलने के बाद बुलाने को तैयार हुआ पाकिस्तान

दो दिन बीतने के बाद भी जब भारत व पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को वापस बुलाने के लिए हां नहीं की तो यूएई सरकार ने सीधे तौर पर धमकी दी। एलान किया गया कि यूएई सरकार कोरोना खत्म होने के बाद भारत व पाकिस्तान के साथ किए गए समझौतों में कटौती करेगी। इसका मतलब ये हुआ कि यूएई सरकार दोनों मुल्कों के प्रति सख्त रवैया अपनाएगी।

इस धमकी के बाद पाकिस्तान की सरकार ने फैसला लिया कि वह यूएई में फंसे अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए तैयार है, जिसके चलते गत मंगलवार को दुबई से दो विमान पाकिस्तान भेजे गए। लेकिन भारत सरकार ने यूएई में फंसे नागरिकों को बुलाने के लिए कोई फैसला नहीं लिया है, जिससे यूएई में फंसे भारतीय नागरिकों में खासा रोष है।

यूएई सरकार ने भारतीयों को राहत दी
एक अनुमान के अनुसार, इस समय यूएई में लगभग 30 हजार के करीब भारतीय नागरिक हैं, जो तत्काल भारत लौटना चाहते हैं। कोरोना संकट को देखते हुए यूएई सरकार ने एलान किया है कि देश में रह रहे सभी रेजिडेंस, विजिटर्स और टूरिस्टों का वीजा बिना किसी आवेदन व फीस, जुर्माना के 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ाया जाता है। इससे भारतीयों को यूएई में काफी राहत मिली है।

…इलाज को पैसे नहीं कभी भी मर सकती है मां

शारजाह में रह रहे एक भारतीय परिवार ने यूएई के मीडिया गल्फ न्यूज से बातचीत में बताया कि वह परिवार समेत टूरिस्ट वीजा पर यूएई आए थे। वे यहां काम करके अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद हो गया। उनके पास जो पैसे थे वह घर का किराया और राशन पानी में खर्च हो गए।

अब हालात ऐसे हैं कि घर में बुजुर्ग मां की दवा के लिए पैसे नही हैं और उनकी हालत काफी गंभीर है। अगर जल्दी ही भारत आकर उसी डॉक्टर से मां का उपचार नहीं करवाया गया, जिससे पहला उनका उपचार करवाया जा रहा था तो किसी भी समय उनकी जान भी जा सकती है। ऐसे ही कई किस्से हैं, जिन्हें गल्फ न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में प्रकाशित किया है।

ReportLook Desk

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