Aligarh Muslim University (AMU) के छात्र नेता फरहान जुबैरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोप है कि 29 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने फ्रांस और इसाईयों के खिलाफ विवादित बयान दिया था। कहा था- जो कोई भी इस्लाम को बदनाम करेगा, हम उसका सिर कलम कर देंगे।

जुबैरी के बयान से जुड़े वायरल वीडियो में वह साफ-साफ कहते सुनाई दिए, “अगर कोई ईशनिंदा करेगा, तब हम उसका सिर कलम कर देंगे। चूंकि, हमारी संस्था और इस्लाम की खोज कलमा-ला-इलाहा, मोहम्मद-उन-रसूल अल्लाह (भगवान नहीं है, पर अल्लाह है और मोहम्मद उनके मैसेंजर हैं) पर है। अगर कोई हमारे विधाता के साथ गलत करेगा, तब हम उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ ने जुबैरी के शुक्रवार के बयान के हवाले से बताया, “किसी भी धर्म को मानने वाले अपने नबी का अपमान नहीं सहेगा। मुस्लिम भावनाओं को जिस चीज ने भड़काया है, वह यह है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने मुसलमानों के खिलाफ नफरत के ऐसे एजेंडे को सही ठहराने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया है।”

बकौल एएमयू छात्र नेता, “हम अपने प्रदर्शनों को और तेज करेंगे और सभी फ्रेंच उत्पादों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे, क्योंकि परेशान करने वाले इस मुद्दे पर यही अपने गुस्से और नाराजगी को जाहिर करने का बड़ा और कड़ा तरीका है।”

पूर्व मेजर गौरव आर्या ने जुबैरी के बयान पर कहा था- एएमयू का छात्र कहता है कि अगर कोई पैगंबर मोहम्मद का अपमान करेगा, तब वह उसका सिर कलम कर देंगे। भीड़ भी उसके इस बयान पर पुरजोर समर्थन कर रही थी। न कोई कोर्ट्, न वकील, न जज और न कोई संविधान। ये तो हर किसी को ऐसे मार रहे हैं। फिर शिक्षा का मतलब क्या हुआ?

बता दें कि फ्रांस के पेरिस में टीचर की गला काटकर हत्या के बाद फ्रांस के नीस शहर में एक बार फिर इस्लामिक आतंकी हमला हुआ था। इसे लेकर वहां के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा था, “हमारा देश इस्लामिक आतंक का शिकार हुआ है।” उनके इसी बयान के बाद इस्लामिक आतंकवाद का मुद्दा गर्मा गया और दुनिया के कई देश दो ध्रुवों में बंटते नजर आए।

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