अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से पहले चार सांसदों ने कश्मीर में मानवाधिकार हालात और धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का आकलन करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सैकड़ों कश्मीरी अब भी एहतियातन हिरासत में हैं। मांग करने वाले सांसद खुद को भारत का दीर्घकालिक मित्र बताते हैं।

सांसदों के द्विदलीय समूह ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को भेजे पत्र में कहा है कि किसी भी लोकतंत्र में सर्वाधिक अवधि तक इंटरनेट ठप रहने की घटना भारत में हुई है। इससे 70 लाख लोगों तक चिकित्सा, कारोबार तथा शिक्षा की उपलब्धता बाधित हुई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा हालात का जायजा लेने के बाद घाटी में इंटरनेट चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा है।

सांसदों ने पत्र में लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की स्वायत्ता एकतरफा तरीके से खत्म किया है। इसके छह महीने बाद भी सरकार ने क्षेत्र में इंटरनेट पर पाबंदी लगा रखी है। इसमें कहा गया कि महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियों समेत सैकड़ों कश्मीरी एहतियाती हिरासत में हैं।

पत्र पर इनके हस्ताक्षर
पत्र में क्रिस वान हॉलेन, टोड यंग, रिचर्ड जे डर्बिन और लिंडसे ओ ग्राहम के हस्ताक्षर हैं। इसमें लिखा है कि भारत सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जो कुछ धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए नुकसानदायक हैं।

देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने के लिए खतरा पैदा करते हैं। इसमें विवादित संशोधित नागरिकता कानून शामिल है, जिसे भारत के उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है।

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