पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष राजनीतिक सहायक डॉ. शाहबाज गिल ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी सज्जन जिंदल के साथ मिले होने का आरोप लगाया है। राजनीति में सेना के दखल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले नवाज शरीफ पर देशद्रोह के आरोप लगाते हुए गिल ने कहा कि पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ सेना को इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि सेना ने उन्हें मोदी और जिंदल से लिंक और देशद्रोही गतिविधियों के लिए सवाल किया था।

गिल ने यह भी आरोप लगाया कि शरीफ और उनकी सरकार कुलभूषण जाधव को पकड़े जाने की घोषणा करने को तैयार नहीं थी। (रिटायर्ड) लेप्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा ने नवाज शरीफ सरकार को मनाने के लिए बहुत कोशिश की, क्योंकि सेना की ओर से इसकी घोषणा से संदेश जाता कि पाकिस्तान की सरकार इसमें साथ नहीं है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोदित करते हुए गिल ने कहा, ”जब आप इस तरह पाकिस्तान विरोधी गतिविधियां करोगे, सवाल पूछे जाएंगे और जवाब मांगा जाएगा। भारतीय नेतृत्व के साथ प्यार और संवेदना का आरोप लगाते हुए गिल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री से जब भी सेना ने उनसे भारत के साथ सीक्रेट बिजनेस डील और दूसरी देशद्रोही गतिविधियों के बारे में सवाल किया तो उन्हें इसी तरह टकराव किया।

भारतीय पत्रकार बरखा दत्त की किताब का जिक्र करते हुए गिल ने कहा कि नवाज शरीफ ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में मोदी के साथ सीक्रेट मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान पीएम ने पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स को आदेश दिया था कि वे भारत के खिलाफ कोई बयान ना दें। गिल ने कहा, ”नवाज शरीफ ने रक्षा संस्थाओं को किनारे करके मोदी और जिंदल से अकेले में मुलाकात की थी। जब उनसे सवाल किए गए तो उन्होंने सेना को टारगेट करना शुरू कर दिया और लोकतंत्र के नारे लगाने लगे।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने सेना और इमरान खान की सरकार के खिलाफ महागठबंधन का ऐलान किया है। नवाज शरीफ सहित देश के लगभग सभी विपक्षी नेताओं ने साझा मंच बनाते हुए कहा है कि वह राजनीति से सेना दखल खत्म करना चाहते हैं। सेना की गठपुतली कही जाने वाली इमरान सरकार इसको लेकर बेचैन और नवाज शरीफ को देशद्रोही साबित करने में जुटी है।

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