प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 17 नवंबर को होने जा रहे 12वें वर्चुअल ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। ब्रिक्स एनएसए की बैठक रूस में हुई थी, जिसमें भारत का प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीन की तरफ से राजनयिक यांग चिएची कर रहे थे।

ब्रिक्स देशों के नेताओं के बीच बैठक का इस बार का थीम होगा- “वैश्विक स्थिरता, साझा सुरक्षा और अभिनव विकास के लिए ब्रिक्स भागीदारी”। बयान में कहा गया है, “2020 में रूसी ब्रिक्स की अध्यक्षता का मुख्य उद्देश्य हमारे लोगों के जीवन स्तर और जीवन स्तर को बढ़ाने में योगदान देना है।”

एडवाइजर टू द प्रसिडेंट ऑफ द रशियन फेडरेशन एंटोन कोब्यकोव ने कहा- कोविड-19 महामारी के चलते मौजूदा वैश्विक परिस्थिति के बावजूद रूस की अध्यक्षता में ब्रिक्स की गतिविधियां सामान्य तरीके से चल रही हैं। जनवरी 2020 से लेकर अब तचक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समेत करीब 60 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।

इससे पहले, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक के दौरान बातचीत हुई। उससे पहले, भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच भी मॉस्को में ब्रिक्स रक्षामंत्रियों के बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थई। इस दौरान सीमा पर तनाव को लेकर काफी देर तक बातचीत हुई। लेकिन, तनाव कम करने में अभी तक कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में मई के महीने से ही गतिरोध बना हुआ। अब तक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक से लेकर सैन्य स्तर तक कई दौर की बातचीत हुई है। लेकिन, सीमा पर सैन्य जमावड़ा कम नहीं हो रहा है। गलवान हिंसा के बाद दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास एक दूसरे के ऊपर न के बराबर रह गया है।

ऐसे में लगातार इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि सीमा पर तनाव कम किया जाए। लेकिन, तनाव का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वायुसेना प्रमुख ने बयान देते हुए कहा कि सीमा पर युद्ध के हालात हैं और न ही शांति के। वायुसेना प्रमुख ने टू फ्रंट वॉर की स्थिति में करारा जवाब देने की बात कही है। इन सबके बीच, अगर ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति आमने-सामने होंगे तो उम्मीद की जानी चाहिए कि तनाव कम करने में मदद मिलेगी।

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