बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीट जीतकर सब को चौंकाने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अब एक बड़ा ऐलान किया है। बिहार की सफलता के बाद अब AIMIM पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने जा रही है। ओवैसी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा कि वह अपनी पार्टी का विस्तार उत्तर प्रदेश और बंगाल में भी करने की योजना बना रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर ओवैसी एनडीए विरोधी पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। क्योंकि ओवैसी के ऐसा करने से ‘सेक्युलर’ और ‘मुस्लिम’ वोट बंट जाएंगे।

ओवैसी ने कई राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर AIMIM के राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने का संकेत देते हुए कहा, ‘मैं पश्चिम बंगाल, यूपी के साथ ही भारत का हर चुनाव लड़ूंगा। मुझे केवल मौत ही रोक सकती है। क्या मुझे चुनाव लड़ने से पहले किसी से पूछना होगा? मैं बेजुबानों के लिए लड़ता हूं। मुझे पूरा हक है अपनी पार्टी के विस्तार करने का।’ उनके इस फैसले से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा सकता है। क्योंकि टीएमसी का बड़ा वोट बैंक मुस्लिम है और ओवैसी के आने से यह विभाजित हो सकता है।

पिछले दिनों कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने AIMIM चीफ पर निशाना साधा था और उन्हें वोट काटने वाला बताया था। इसपर ओवैसी ने कहा “हम बंगाल में आ रहे हैं और किसी भी कीमत पर वहां जाएंगे। हम मुर्शिदाबाद, माल्दा, दिनाजपुर के इलाकों में जाएंगे। क्या अधीर रंजन चौधरी ने वहां मुस्लिमों का ठेका लिया हुआ है?”

बता दें बंगाल में लगभग 32 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। राज्‍य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 98 विधानसभा क्षेत्रों में 30 प्रतिशत से ज्‍यादा मुस्लिम आबादी है। मुर्शिदाबाद जिले में करीब 66.3 % मुस्लिम रहते हैं। इस क्षेत्र में 22 विधानसभा सीटें आती हैं। AIMIM ने बिहार के सीमांचल में तेजस्वी की पार्टी आरजेडी का खेल बिगाड़ते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की है।

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  1. जब कांग्रेस की तूती बीती थी तब उनके नेता मुसलिम आगेवानो को झकझोर देते थे दुसरे ईलाके के मुकाबले बहुत कम रकम देते थे ओर ज्यादा मांगने पर कहते थे मुस्लिम कांग्रेस को वोट नहीं देंगे तो कीसको देंगे ? जब मुस्लिम बहुल ईलाके मे वोटिंग कम होने लगी 25/30% तब भी कैफ मे रहे जब बाबरी मस्जिद के बाद रोष बढता ही चला गया 2002 के दंगे के बाद जो केन्द्र सरकार को कार्य वाही करनी चाहिए वो नहीं की बाद जहां विकल्प मीला वहां अपनालीया युपी मे बसपा बाद मे सपा बंगाल उड़ीसा महाराष्ट्र आन्ध्र तमिलनाडु केरल उसका उदाहरण हे राष्ट्रीय सतर पर सीर्फ दो पालतु टट्टू बचे वो खुद उनके मत सेत्र मे हारे हुवे हे कुल मीलाके नेतागिरी उतरने नहीं दी के ना उनसे कीसी ने पुछा इतना सहन करने के बाद जब महाराष्ट्र चुनाव मे औवेसी जी ने उनके सहयोगी को सीट देने को कहा ये भी ना माना,,,,फिर ऐक ही विकल्प बचा था लड लेना और आखीर हुवा ये के पास सीट जीत ओर 20 सीट हरवा दी ये अच्छा ही हुवा (मिटा तु अपनी हस्ती को गर कुछ मरतबा चाहे के दाना खाक मे मील कर गुलू गुलजार होता हे) जो हारे हे उसका मुजे गम नहीं हे पर जो पांच पनपते हे उसकी मुजे खुशी हे

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