नई दिल्ली. उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है.

उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उन्हें कोर्ट में पेश कर रिहा करने की मांग की थी. इसपर कोर्ट ने नोटिस जारी कर जम्मू-कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी.

सारा ने अपनी याचिका में कहा है कि अब्दुल्ला को हिरासत में रखना ‘स्पष्ट रूप से गैरकानूनी’ है और उनसे ‘कानून व्यवस्था को किसी खतरे’ का कोई सवाल ही नहीं है. याचिका में अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखने के पांच फरवरी के आदेश को रद्द करने के साथ उन्हें अदालत के समक्ष पेश कराने का अनुरोध किया गया है.

उमर अब्दुल्ला की बहन सारा ने याचिका में दिया था तर्क
पायलट ने कहा कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ विरोध को दबाया जा सके, गलत तरीके से दंड प्रक्रिया संहिता का इस्तेमाल कर राजनीतिक नेताओं और लोगों को हिरासत में रखा है.

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने का उद्देश्य न केवल उमर अब्दुल्ला को कैद में रखने के लिए, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूरे नेतृत्व को और साथ ही अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेतृत्व को कैद में रखने का है.

इसी तरह का व्यवहार फारूक अब्दुल्ला के साथ किया गया है जिन्होंने वर्षों तक राज्य और केंद्र की सेवा की… जब भी जरूरत पड़ी, भारत के साथ खड़े हुए.

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