अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में अब कुछ घंटे ही बचे हैं और वहां चुनाव बाद हिंसा की आशंका को लेकर पूरे देश में पुलिस सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। हालात इतने गंभीर इसलिए हैं क्योंकि बीते दस महीनों में यहां 50 लाख से अधिक हथियार बिक गए जो कि अमेरिका के इतिहास में रिकॉर्ड खरीदारी है। हिंसा और लूटपाट की आशंका को देखते हुए न्यूयॉर्क समेत कई राज्यों में दुकानदारों ने अपने स्टोर बंद कर दिए हैं।

चंद महीनों में लाखों बंदूकों की रिकॉर्ड खरीद

बंदूक उद्योग संघ के सर्वे से पता लगा कि जनवरी से सितंबर तक अमेरिका में 50 लाख से अधिक बंदूकें बिक गईं। एफबीआई के मुताबिक, अकेले 21 मार्च को देश में 2.1 लाख हथियार खरीदे गए। यह एक दिन में हुई बंदूक बिक्री का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। पूरे महीने में 37 लाख बंदूकें खरीदी गईं जबकि 2019 में इसी माह 11 लाख की कुल खरीदारी हुई थी। खरीदारी में इलिनोइस राज्य सबसे आगे रहा। टेक्सास, केंटकी, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में भी बहुत बड़ी तादाद में हथियार खरीदे गए।

युवा, अश्वेत और महिलाएं सबसे ज्यादा डरी हुईं

बंदूक उद्योग संघ के सर्वे के मुताबिक, अपनी सुरक्षा की चिंता में बंदूक खरीदने वालों में युवा, महिलाओं और अश्वेत समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है। जनवरी से अप्रैल तक बंदूकों की जितनी बिक्री हुई, उसमें 40% हिस्सा पहली बार के हथियार खरीदारों का था, जिनमें ज्यादातर युवा हैं। महिलाओं में हथियार खरीद 40% और अश्वेतों के बीच 58% बढ़ गई।

कई राज्यों में हिंसा का खतरा

सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन राज्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर है, जहां डेमोक्रेट अथवा रिपब्लिक समर्थकों का प्रभुत्व रहा है। स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में हिंसा होने की ज्यादा संभावना है। फिलाडेल्फिया राज्य सरकार ने हिंसा की स्थिति में सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। पेंसिल्वेनिया राज्य में वामपंथी कार्यकर्ताओं और दक्षिणपंथी सशस्त्र समूहों के बीच हिंसा की बहुत घटनाएं होने से इस राज्य में सुरक्षा बढ़ाई गई है। टेक्सास, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, ओरेगन राज्यों में ज्यादा सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

नेशनल गार्ड को बुलाया

न्यू जर्सी, विस्कॉन्सिन, टेक्सास, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, ओरेगन व अन्य राज्यों में नेशनल गार्ड इकाइयों को बुलाया जा रहा है। एजेंसियों को यह भी चिंता है कि ज्यादा सुरक्षाबल देखकर कहीं मतदाता दहशत में आकर मतदान करने ही न निकलें इसलिए सुरक्षाकर्मियों को सादी वर्दी में भी तैनात किया जाएगा।

हथियारबंद मिलिशिया समूहों से खतरा

एफबीआई ने हाल में कहा है कि देश में अचानक से हथियारबंद मिलिशिया समूहों का उदय हो गया जो किसी सरकार द्वारा समर्थित नहीं हैं। ऐसे समूह चुनाव के बाद हिंसा करा सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर समूह दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े हैं। एक स्वतंत्र मिलिशिया ग्रुप ट्रैकर संस्था का दावा है कि ये करीब 70 समूह हैं, जिनमें से कइयों ने खुलेआम ट्रंप का समर्थन किया है। ऐसे में चिंता की बात यह है कि ट्रंप के न जीतने पर ये समूह हिंसा न फैलाएं।

डेमोक्रेट नेता के जीतते ही बढ़ जाती है हथियार खरीद

विचारधारा के स्तर पर डेमोक्रेट मानते हैं कि अमेरिका में बढ़ रही हिंसा को रोकने के लिए हथियार बिक्री के नियम सख्त कर देने चाहिए, यही कारण है कि डेमोक्रेट नेता के जीतने की संभावना के साथ अमेरिका में हथियारों की खरीद में उछाल आता रहा है। बराक ओबामा की जीत के दौरान भी ऐसा देखने को मिला था पर इस बार ऐसे लोग भी हथियार खरीद रहे हैं जो उदारवादी विचारधारा के हैं।  

गोला-बारूद की हुई कमी

नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अनुसार, 2019 के मुकाबले इस साल की पहली छमाही में अमेरिकी गोला-बारूद की खरीद में 139 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे नामी रिटेलरों के पास गोला-बारूद की कमी हो गई। कई जगह लंबी लाइनों में लगकर गोला-बारूद और हथियार खरीदने की दृश्य देखने को मिले। वहीं, बहुत अधिक मात्रा में खरीदारी होने के बाद गूगल और अमेजन ने ऑनलाइन हथियार और गोला-बारूद की बिक्री बंद कर दी।  

सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट से चिंता

न्यूजर्सी ऑफिस ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के निदेशक जेरेड एम ने बताया चुनाव को लेकर गलत सूचनाएं प्रचारित की जा रही हैं जो लोगों को भड़काने का साधन बन सकती हैं। हम ऐसे पोस्टों पर नजर बनाए हुए हैं और साइबर हमलों को लेकर भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ‘जब एक राष्ट्रपति ही चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगे तो चुनाव परिणामों को लेकर आम लोगों को भड़काना आसान हो जाता है।’

दुकानें बंद करने लगे लोग

लूटमार और हिंसा के डर से कैलिफोर्निया के बेवेर्ली हिल्स शहर में दुकानदारों ने अपने-अपने स्टोर बंद कर दिए हैं। कई दूसरे शहरों में भी अफरा-तफरी का माहौल है जिसे स्थानीय मीडिया द्वारा बड़े स्तर पर रिपोर्ट किया जा रहा है।

विशेषज्ञ की राय —

नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के संस्थापक मार्क ओलिवा ने बताया कि अश्वेतों व अन्य अल्पसंख्यकों के हथियार खरीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाती है कि वे पुलिसिया कार्रवाइयों, नस्लीय हमलों, महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों और चुनावी नतीजों के बाद की स्थिति को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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