रूस ने जी-7 (ग्रुप7) के उस आमंत्रण को नकार दिया है जिसमें उसे शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है. रूस ने जी-7 को पुराने जमाने का (आउटडेटेड) संगठन करार दिया है. उसने जी-20 में ही बने रहने की मंशा जताई है. रूस का कहना है कि चीन के बिना कोई मंच अधूरा है. अमेरिका ने रूस और भारत को जी-7 में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है. यह प्रस्ताव खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे बढ़ाया है.

इस बारे में रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखरोवा ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रस्ताव पर गौर किया है. इसके बारे में रूस का यही कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से पूरी तरह सहमत हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि जी-7 आउटडेटेड देशों का समूह है जो दुनिया के वास्तविक हालात का प्रतिनिधित्व नहीं करता.

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि वे इस बात से इत्तेफाक रखती हैं. उन्होंने कहा, इस बारे में हमारा मत जगजाहिर है. पश्चिमी देशों के क्लब में रह कर वैश्विक नीतियों और अर्थव्यवस्था के मुद्दों को निपटाना असंभव है. आज की यह सबसे बड़ी सच्चाई है.

मारिया जाखरोवा ने कहा, सामान्य तौर पर देखें तो जी-7 के विस्तार का विचार सही दिशा में कदम है लेकिन इससे सही मायनों में नुमाइंदगी (प्रतिनिधित्व) नहीं मिल पाती. उदाहरण के लिए, यह स्पष्ट है कि गंभीर वैश्विक मुद्दों को निपटाने में चीन के बिना कुछ नहीं हो सकता.

मारिया ने कहा, अभी हमारे पास काफी सक्षम और पहले से जांचा परखा जी-20 का फॉर्मेट है, ब्रिक्स भी है. इसके अलावा दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभाव रखने वाले और भी कई मंच हैं.

बता दें, डोनाल्ड ट्रंप ने अभी हाल में कहा था कि जी-7 को सितंबर तक स्थगित किया जा रहा है. इस बैठक में अब रूस, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और भारत को शामिल किया जाए. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता है कि जी-7 पूरी दुनिया में जो चल रहा है उसका सही ढंग से प्रतिनिधित्व करता है.

यह बेहद पुराने ढर्रे के देशों का समूह है.’ व्हाइट हाउस के स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस के निदेशक एलिसा एलेक्जेंड्रा फराह ने कहा कि यह हमारे पारंपरिक सहयोगियों को एक साथ ला रहा है, जिससे हम चर्चा करें कि कैसे चीन के भविष्य के साथ निपटा जाए.

जी-7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा शामिल हैं. इन देशों के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक और मौद्रिक मुद्दों पर हर साल बैठक करते हैं. इस साल के जी-7 की अगुवाई अमेरिका कर रहा है. शिखर सम्मेलन के दौरान, जी-7 अध्यक्ष आम तौर पर एक या दो देशों के प्रमुखों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकता है. बीते साल फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैनुएल मैक्रोन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया था.

ReportLook Desk

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