कृषि बिल के बाद अब मोदी सरकार के लेबर रिफॉर्म एजेंडे को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर संघ परिवार में भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े यूनियन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने श्रम कानूनों के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

इन तीन लेबर कोड बिलों के अंतर्गत दो दर्जन से अधिक विभिन्न केंद्रीय श्रम कानून आते हैं और कई सामाजिक सुरक्षा उपायों, रोजगार की शर्तों आदि को पेश करते हैं। वैसे तो बीएमएस इन लेबर कोड बिलों का समर्थन कर रहा है। लेकिन वह इसके कुछ प्रावधानों के खिलाफ हैं और मानती हैं कि ये ‘श्रमिक विरोधी’ हैं। हड़ताल के अधिकार को वापस लेने और नौकरी अनुबंधों में लचीलापन जैसे कुछ प्रावधानों के खिलाफ ट्रेड यूनियन विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

बीएमएस के महासचिव, बिनय कुमार सिन्हा ने कहा, “बीएमएस के 19वें राष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअली निर्णय लिया गया है कि नए श्रम कोड में श्रमिक विरोधी प्रावधानों के खिलाफ निरंतर अखिल भारतीय आंदोलन किया जाएगा।” सम्मेलन में तय किया गया है कि सरकार से नए श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी प्रावधानों को तुरंत वापस लेने की मांग की जाएगी। संगठन बीएमएस और अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ एक परामर्श बैठक बुलाना चाहता था ताकि श्रमिकों और उद्योग दोनों के लिए श्रम कोड को लाभकारी बनाया जा सके।

बीएमएस 10 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक देश व्यापी “चेतावनी सप्ताह” कार्यक्रम आयोजित करेगा।इसके बाद 28 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। सिन्हा ने कहा, “अगर सरकार श्रमिकों की आवाज सुनने के लिए तैयार नहीं है, तो हम हड़ताल के अधिकार को वापस लेने और अन्य श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए देश भर में निरंतर आंदोलन करेंगे।”

इससे पहले बीएमएस के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने कहा था कि जिस तरह से सरकार ने तीन लेबर कोड बिल पारित किए हैं, हम उसका विरोध करते हैं। सरकार ने लेबर कोड बिल जल्दबाजी में पारित कराएं, जो ठीक नहीं हैं। इस पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई। सरकार ने हमारी महत्वपूर्ण मांगें नहीं मानी हैं। हमने मांग की थी कि सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था यूनिवर्सलाइज करनी चाहिए। यानी देश के हर मजदूर को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का फायदा मिलना चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

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