कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को पार्टी के नेताओं को जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष करने को कहा। साथ ही, उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि लोकतंत्र सबसे मुश्किल समय से गुजर रहा है। सोनिया गांधी ने अपनी अध्यक्षता में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की एक बैठक में पार्टी के नेताओं से यह अपील की।

बैठक के बारे में ट्वीट कर जानकारी देते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘सोनिया जी ने हर किसी से जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष करने और उनकी दशा बेहतर करने की अपील की है, क्योंकि हमारा लोकतंत्र सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है।’

यह बैठक खासा मायने रखती है क्योंकि यह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। साथ ही, मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों (पर उपचुनाव) सहित विभिन्न राज्यों में होने जा रहे उपचुनावों से पहले हुई है।

कांग्रेस नए कृषि कानूनों को केंद्र द्वारा पारित कराए जाने का मुद्दा, उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार एवं उसकी मौत का मामला, उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति और देश में अर्थव्यवस्था की स्थिति से जुड़े मुद्दे जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी नए कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन भी कर रही है।

पिछले महीने कांग्रेस में सांगठनिक स्तर पर बड़े फेरबदल के बाद सोनिया गांधी ने पहली बार महासचिवों और राज्य प्रभारियों की बैठक की अध्यक्षता की। हाल ही में पारित कृषि कानूनों को लेकर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा नीत सरकार ने इन कानूनों से भारत की लचीली कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर ही हमला किया है।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘हरित क्रांति से मिले फायदों को समाप्त करने की साजिश रची गई है। करोड़ों खेतिहर मजदूरों, बंटाईदारों, पट्टेदारों, छोटे और सीमांत किसानों, छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर हमला हुआ है। इस षड्यंत्र को मिलकर विफल करना हमारा कर्तव्य है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हाल ही में तीनों कानूनों- कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 को मंजूरी प्रदान की थी।

सोनिया गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने देश के नागरिकों की मेहनत और कांग्रेस सरकारों की दूरदृष्टि से बनाई गयी मजबूत अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने कहा, ”जिस प्रकार से अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। आज युवाओं के पास रोजगार नहीं है। करीब 14 करोड़ रोजगार खत्म हो गए। छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी खत्म हो रही है। लेकिन मौजूदा सरकार को कोई परवाह नहीं।

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