वाशिंगटन। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि हाल के दिनों में तालिबान के साथ शांति वार्ता में ‘काफी अहम सफलता’ मिली है। इससे पहले, रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा था कि उन्होंने एक सप्ताह तक हिंसा में कमी के लिए ‘एक प्रस्ताव पर बातचीत की’।

आपको बता दे 18 साल से चल रहे इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है सैनिकों के साथ साथ अमेरिका की जीडीपी को भी एक बड़ा झटका तालिबान ने दिया।

अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता से वादा किया था कि वह अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सेना को वापिस बुला लेंगे और इस 18 वर्ष से चल रहे युद्ध को ख़त्म कर देंगे। वहीं जानकारों का कहना है कि तालिबान से मिल रहे कड़े मुकाबले के बाद अमेरिका को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

जब अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर नाटो कि सेना लेकर धावा बोला था कि आतंकवादियो से समझौता नहीं करेंगे वहीं अमेरिका आज तालिबान से शांति की अपील कर रहा है और वहीं अमेरिका अब अफ़ग़ानिस्तान से बोरिया बिस्तर बांधने कि तैयारी में है।

दोनों पक्ष लंबे समय से अफगानिस्तान में 18 वर्ष से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से वार्ता में लगे हुए हैं।

इन पर चुनौतियों का प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर में वार्ता को ‘मृत’ घोषित कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को पोम्पियो ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति ने वार्ता आगे बढ़ाने को लेकर अनुमति दे दी है। उन्होंने हालिया प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि वार्ता जटिल है और शांति समझौता अभी तक नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम उस जगह पहुंच सकते हैं जहां हम केवल कागज के टुकड़े पर ही नहीं,बल्कि वास्तव में हिंसा में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर हम वहां पहुंच सकते हैं तो हम अच्छी तरह से गंभीर चर्चा शुरू करने में सक्षम हो सकते हैं।

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