उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नवरात्र के प्रथम दिन मेहड़ापुरवां में एक दुर्गा देवी के वहां लगी भीड़ को हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम से लोग उलझ गए। दुर्गा देवी बनी महिला ने तलवार से एसडीएम और सीओ पर प्रहार कर दिया। संयोग ही रहा कि किसी को चोट नहीं लगी। बाद में पहुंची फोर्स ने दुर्गा देवी के साथ ही 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया गया।

सदर कोतवाली के मेहड़ापुरवां में परिषदीय शिक्षक शिव प्रसाद यादव की पत्नी सुभद्रा देवी वर्षों से अंधविश्वास का धंधा चलाती है। दूर-दूर से महिला और पुरुष यहां आते हैं। उनको यहां ठीक करने का दावा किया जाता है। कई महिलाओं और लड़कियों को एक ही कमरे में बंद कर दिया जाता है।

बुधवार की सुबह जिला प्रशासन को सूचना मिली कि यहां काफी भीड़ है। एसडीएम दिनेश मिश्र और सीओ सिटी निष्ठा उपाध्याय के नेतृत्व में टीम वहां पहुंची। करीब 100 की संख्या में मौजूद महिला-पुरुषों ने विरोध शुरू कर दिया। दुर्गा देवी का रूप धारण की सुभद्रा देवी तलवार से इन लोगों पर वार कर दी। संयोग ही रहा कि तलवार किसी को लगा नहीं। बाद में पहुंची फोर्स ने कड़ाई कर 12 लोगों को पकड़ लिया।

एसआई अंजनी कुमार की तहरीर पर सदर कोतवाली पुलिस ने मेहड़ापुरवां की सुभद्रा देवी, उनके पति शिव प्रसाद यादव, बेटे अवनीश यादव, बहू मानवी यादव, गांव निवासी उषा देवी, रिया राजभर निवासी अंडिला, मईल, पूजा भारती निवासी छितौनी, हाटा, कुशीनगर, नेहा यादव निवासी रामपुर खुर्द, रामपुर कारखाना, जोखू चौहान निवासी बढ़या बुजुर्ग, सदर कोतवाली, सुभाष सिंह निवासी डिघवा, रामपुर कारखाना, देवा यादव निवासी विशुनपुर भरत राय, रामपुर कारखाना और विकास कुमार निवासी धतुरा खास, गौरीबाजार के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास, अंध विश्वास फैलाने, आर्म्स एक्ट, सेवेन सीएलए एक्ट और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। आवश्यक कार्रवाई पूर्ण कर सभी को जेल भेज दिया गया। इस बाबत सीओ सिटी निष्ठा उपाध्याय ने बताया कि केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।

शिक्षक निलंबित
बैतालपुर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय धतुरा खास के सहायक अध्यापक शिव प्रसाद यादव को निलंबित कर दिया गया है। बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने बुधवार को बताया कि उक्त शिक्षक पुरवामेहड़ा में अपने निवास स्थान पर अपनी पत्नी की ओर से एकत्रित भीड़ का झांड़-फूंक करते हुए पाया गया। प्रशासन ने मना किया तो अधिकारियों से वह उलझ गया। कोरोना संक्रमण से बचाने को प्रधानमंत्री सहित मुख्यमंत्री जनता का सहयोग मांग रहे हैं। ऐसे में अनावश्यक भीड़ जुटाने, आडंबर फैलाने एवं महामारी के रोकथाम में सहयोग नहीं करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है

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