दिल्ली. मुक्केबाजी में भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता और कांग्रेस नेता विजेंदर सिंह ने रविवार को धमकी दी कि अगर केंद्र सरकार नए कृषि कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग स्वीकार नहीं करती है तो वह राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार लौटा देंगे।

उन्होंने नए कानून को ‘काला कानून’ करार दिया। हरियाणा के भिवानी जिले का 35 साल का यह मुक्केबाज दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच पहुंचा और उनके प्रति एकजुटता दिखाई।

विजेंदर ने किसानों से कहा, ‘‘अगर सरकार इन काले कानूनों को वापस नहीं लेती है तो मैं उनसे आग्रह करूंगा कि मेरा पुरस्कार वापस ले लें। ” उन्होंने कहा, ‘‘अब बहुत हो चुका, अगर सरकार किसानों की मांगें नहीं मानती है तो मैंने फैसला किया है कि एकजुटता दिखाते हुए मैं अपना खेल रत्न पुरस्कार लौटा दूंगा।”

इस मुक्केबाज ने कहा, ‘‘मैं किसानों और सेना से ताल्लुक रखने वाले परिवार से आता हूं, मैं उनकी पीड़ा और मजबूरी समझ सकता हूं। समय आ गया है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे।” विजेंदर ने 2008 बीजिंग खेलों में कांस्य पदक के रूप में मुक्केबाजी में भारत का पहला ओलंपिक पदक जीता था।

विजेंदर 2009 में विश्व चैंपियनशिप (कांस्य पदक) में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज भी बने थे। इसी साल उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया था। विजेंदर फिलहाल पेशेवर मुक्केबाज हैं और उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर यह पुरस्कार मेरे लिए काफी मायने रखता है लेकिन हमें उन चीजों के साथ भी खड़ा होना पड़ता है जिनमें हम विश्वास रखते हैं। अगर बातचीत के साथ संकट का समाधान निकल सकता है तो हम सभी को खुशी होगी।” इससे पहले बीजिंग ओलंपिक के दौरान प्रभारी पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाजी कोच गुरबक्श सिंह संधू ने भी किसानों की मांगों को नहीं मानने की स्थिति में अपना द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटाने की बात कही थी

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