हाथरस रेपकांड की आड़ में जातीय दंगा भड़काने प्लानिंग के आरोप में यूपी पुलिस ने मथुरा से पीएफआई के 4 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये चारों दिल्ली से हाथरस के लिए निकले थे लेकिन इन्हें मथुरा में गिरफ्तार कर लिया गया।

अब इस गिरफ्तारी के बाद टीवी चैनलों की डिबेट में गर्मागर्मी बढ़ गई है ऐसे में इस्लामिक स्कॉलर अतीक उर रहमान ने एक टीवी डिबेट में इस मामलें पर अपनी बात रखते हुए पीएफआई का पक्ष लिया और पैनलिस्ट विशाल मिश्रा के बयान पर तंज़ कसा। उन्होंने पूछा कि पीएफआई का सदस्य होना गुनाह है क्या, इस दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि RSS तो 3 से 4 बार बैन हो चुका है।

अतीक उर रहमान ने कहा- “बीजेपी ने यह कहा कि एंटी सीएए प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले गलत है तो मैं यह बता दूं कि प्रदर्शन को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक नहीं माना है। एंटी सीएए प्रोटेस्ट में और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में भी बीजेपी ने आरोप लगाया था कि पीएफआई ने विदेश से फंडिंग लेकर वहां प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को 500-500 रुपये बांटे थे और बिरयानी खिलाई थी, हालांकि इस बात को वो साबित नहीं कर पाए और अगर ऐसा विदेशी फंडिंग से देशविरोधी गतिविधियों में रहने वाली पीएफआई है तो अभी तक यह बैन क्यों नहीं हुई है।”

गिरफ्तार किए गए 4 सदस्यों के मामलें में भी अतीक उर रहमान ने संवैधानिक अधिकार गिनाते हुए अपने विपक्षी पैनलिस्टों को घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा-” 144 अगर लगी हुई है तब भी क्या संविधान सभी भारतीय को यह समान अधिकार नहीं देता की वह पूरे भारत में कहीं भी घूम सकते है , जा सकते है।

पीएफआई का सदस्य होना कोई गुनाह हो गया है क्या? क्या ये दिल्ली से हाथरस या केरल से हाथरस नहीं आ सकते क्या?अतीक उर रहमान यहीं नहीं रुके। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस को भी घेरने की कोशिश की। आरएसएस के बैन करने के संबंध में उन्होंने कहा कि आरएसएस भी 3-4 बार बैन हो चुका है तो क्या वो भी ऐसी गतिविधियों में रहता है क्या।

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